रेमी की खेती: रेमी एक झाड़ीनुमा पौधा होता है जिसकी पत्तियां पशुओं के लिए बेहतरीन हरा चारा मानी जाती हैं। इसमें प्रोटीन भरपूर मात्रा में होता है। इसलिए ये पशुओं के लिए बहुत फ़ायदेमंद होती है। रेमी की खेती उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड जैसे राज्यों में अधिक की जाती है।
यहां इसे रिहा या कुनखुरा नाम से भी जाना जाता है। रेमी का इस्तेमाल चारे के रूप में करने के साथ ही किसान भाई इसके रेशे से अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। इसका रेशा बहुत मज़बूत होता है और कपड़ा उद्योग में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जानिए कैसे रेमी की उन्नत खेती करके किसान चारे की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।

मिट्टी और तापमान
भारत में रेमी की खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है, बस उसमें जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। मगर दोमट मिट्टी इसके लिए सबसे अच्छी मानी जाती है। फसल के विकास के लिए तापमान 25-31 डिग्री होना चाहिए।
खेत की तैयारी
अच्छी फसल के लिए मिट्टी को अच्छी तरह से तैयार करना ज़रूरी है। इसलिए फसल की बुवाई से पहले खेत की 2-3 हैरो से गहरी जुताई करें। 20-30 टन प्रति हेक्टेयर सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाएं। मिट्टी के पोषक तत्वों की जांच के बाद उसमें 20 किलो नाइट्रोजन, 15 किलो फॉस्फोरस और 15 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से मिलाएं। फिर फसल की हर बार कटाई के बाद 40 किलो नाइट्रोजन, 20 किलो फॉस्फोरस और 20 किलो पोटाश खेत में डालना ज़रूरी है।

कैसे करें बुवाई?
रेमी के बीज से पौध तैयार करके फिर उसे खेतों में लगाया जा सकता है। इसके अलावा, इसके राइज़ोम यानी जड़ से भी पौधे तैयार किए जा सकते हैं। एक राइज़ोम से 25-30 पौधे तैयार हो सकते हैं। इसके अलावा, प्रकन्दयुक्त तने (प्लांटलेट्स) का भी इस्तेमाल रोपाई के लिए किया जा सकता है। एक हेक्टेयरे में खेती के लिए करीब 55,000 से 60,000 तक प्रकंदयुक्त तने की ज़रूरत पड़ती है। राइज़ोम की तुलना में इसकी लागत कम आती है। रेमी की खेती का सही समय फरवरी से अक्टूबर है और मई-जून में इसके बीज बनने लगते हैं।
पौष्टिक हरा चारा
विशेषज्ञ रेमी को हरे चारे के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, क्योंकि इसकी पत्तियों में 22 से 28 प्रतिशत तक प्रोटीन होता है। रेमी की खेती करके किसानों को पूरे साल हरा चारा मिल सकता है और इसमें लागत भी अधिक नहीं आती। हर 20-25 दिन बाद एक फसल मिल जाती है। खाद और कृषि संगठण (एफएओ) के मुताबिक, रेमी की एक हेक्टेयर फसल से हर साल 300 टन हरा चारा और 42 टन शुष्क पदार्ष प्राप्त होता है। रेमी को देश के विभिन्न हिस्सों में पूरे साल हरे चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे डेयरी किसानों को अपनी आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
पशुओं के लिए रेमी के फायदे
रेमी प्रोटीन से भरपूर होता है, इसलिए इसे खिलाने से पशुओं की दूध की गुणवत्ता में सुधार होता है। हल्दी की तरह ही इसमें भी एंटीबायोटिक गुण है, जिससे इसके सेवन से पशुओं में संक्रमण की समस्या भी कम हो जाती है। यही नहीं चारे के साथ ही किसान इससे रेशा भी प्राप्त कर सकते हैं। इसका रेशा कपड़ा उद्योग में कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है। रेशे से किसानों को अतिरिक्त कमाई हो सकती है। आपको बता दें कि इसका रेशा बाकी किसी भी रेशे से बहुत ज़्यादा मज़बूत माना जाता है।

लंबे समय तक जुताई की ज़रूरत नहीं
इस फसल की ख़ासियत है कि एक बार लगा देने के बाद 15-20 साल तक खेत में जुताई की ज़रूरत नहीं पड़ती, जिससे किसानों की लागत कम होती है। बस बीच-बीच में खरपतवार निकालते रहें। नियमित अंतरात पर सिंचाई करते रहें, क्योंकि मिट्टी में नमी बनाए रखना ज़रूरी है। बरसात में सिंचाई की ज़रूरत नहीं होती।
अंतः फसल के रूप में
रेमी को दलहनी फसलों के साथ उगाकर भी किसान अधिक लाभ कमा सकते हैं। इसके अलावा, इसे नारियल, सुपारी, अनन्नास, पपीता, अमरूद आदि के साथ अंतःफसल के रूप में भी उगाया जा सकता है।
कब करें कटाई?
फसल की कटाई 20-25 दिनों के अंतराल पर करते रहनी चाहिए। एक साल बाद फसल की 12-15 कटाई की जा सकती है। इसकी फसल 15-20 साल तक लगातार पैदावार देती है।
ये भी पढ़ें- नागफनी की खेती: जानिए कैसे किसानों के लिए हरा सोना बन रही नागफनी, एक फसल के कई फ़ायदे
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026: छत पर सोलर पैनल लगाएं, शुरू हुआ Registration PortalKisan of India को Google पर जोड़ें दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 21 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना (PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026) के लिए दिल्ली का रजिस्ट्रेशन पोर्टल शुरू कर दिया है। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी के 2.25 लाख घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का टारगेट… Read more: PM Surya Ghar Yojana Delhi 2026: छत पर सोलर पैनल लगाएं, शुरू हुआ Registration Portal
- WWF Global Conservation Conference में जंगलों के साथ Grasslands और Wetlands बचाने पर ज़ोरWWF Global Conservation Conference में भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर ज़ोर दिया।
- बिना टच किये मछली का Measurement! ICAR-CMFRI का ‘MatsyaMetri’App बदल देगा Fisheries Research की तस्वीर‘MatsyaMetri’ को ARCore-supported Android devices के लिए डिजाइन किया गया है। ‘MatsyaMetri ‘ एक इमेज बेस्ड टूल है। यूज़र मछली की तस्वीर लेता है और ऐप अपने आप उसके आयामों का अनुमान लगाकर माप दर्ज कर लेता है।
- लखनऊ का मलिहाबादी दशहरी आम अब ग्लोबल पहचान की ओर, ODOP में होगा शामिलमलिहाबादी दशहरी आम की मांग अब 25 से अधिक देशों में है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आम पहुंच रहा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
- सिवनी का जम्बो सीताफल: जीआई टैग के साथ बदलेगी किसानों की तकदीर,इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरूसिवनी का जम्बो सीताफल (Seoni’s Jumbo Custard Apple) औसतन 200 से 650 ग्राम का होता है, लेकिन भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के मिलते हैं।
- World Circular Economy Forum 2026 में भारत की सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक चर्चाWorld Circular Economy Forum 2026 में 62 देशों के 3600 से अधिक stakeholders ने Circular Economy पर चर्चा की।
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: 32 साल इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक समझौता,जानिए किस राज्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभकिशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) की नींव 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते में रखी गई थी, लेकिन आर्थिक बोझ और राज्यों के हितों के टकराव ने इसे आठ साल तक ठप कर दिया।
- खेती के साथ मधुमक्खी पालन: पाएं 1.28 लाख का अनुदान,1.92 लाख रुपये की लागत में शुरू करें अपना ख़ुद का बिज़नेसमधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके लिए आपको बड़े खेत या अलग ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। आप अपने घर के आसपास, बगीचे में, पेड़-पौधों वाली जगह पर आसानी से यह यूनिट लगा सकते हैं।
- Google और Mitti Labs का बड़ा करार: धान के खेतों से मीथेन गैस की कटौती और पानी की बचतमिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है।
- CAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने सूखे में दिखाई शानदार सहनशीलता, 35 दिन तक बारिश न होने पर भी बनी रही फ़सलCAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने 35 दिन के सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन कर जलवायु अनुकूल खेती की उम्मीद बढ़ाई।





















