किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में शिव प्रसाद सहनी को मत्स्य पालन श्रेणी में मिला सम्मान
शिव प्रसाद सहनी को किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में मत्स्य पालन श्रेणी में सम्मानित किया गया, उनकी मेहनत ने खेती को नया आयाम दिया।
पशुपालन और मछली पालन से जुड़ी सभी प्रकार की उपयोगी जानकारी जिसकी मदद से किसान भाई अपनी आय बढ़ा सकते हैं एवं नये आय का जरिया ढूंढ सकते हैं।
शिव प्रसाद सहनी को किसान ऑफ़ इंडिया सम्मान 2025 में मत्स्य पालन श्रेणी में सम्मानित किया गया, उनकी मेहनत ने खेती को नया आयाम दिया।
सजावटी मछली पालन (Ornamental Fish Rearing) न सिर्फ एक अच्छा शौक है, बल्कि एक फ़ायदेमंद बिज़नेस (Fish Farming) भी बन सकता है। अगर आपको मछलियों से प्यार है और आप कुछ अलग करना चाहते हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है।
गर्मी के मौसम में पशुओं में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सरकार की ‘पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण योजना’ के तहत, पशुओं के रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और निवारण के लिए पशुपालकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना पशुपालकों को अपने पशुओं के स्वास्थ्य की देखभाल में मदद करती है।
उन्नत नस्ल की देसी गायों को पालने पर दूध का उत्पादन अन्य देसी गायों के मुक़ाबले अधिक होता है। ज़ाहिर है, इससे आपकी आमदनी भी बढ़ेगी। एक बात का ध्यान ज़रूर रखें। हर क्षेत्र के हिसाब से कौन सी देसी गाय उन्नत नस्ल की है, इसकी पूरी जानकारी लेने के बाद ही उस नस्ल को पालें।
सूअर की खाल से मैट, पैराशूट, मोम, उर्वरक, क्रीम, मलहम और रसायन बनाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। बटन, जूते के फीते, दवाइयां, सॉसेज, थाइमस, अग्न्याशय, अग्न्याशय, थायरॉयड, अग्न्याशय से संबंधित दवाईयां इससे बनती हैं। पशु चारा, उर्वरक, और कपड़ों की रंगाई और छपाई के लिए भी उपयोग में लाया जाता है। सूअर पालन के लिए सरकार लोन देती है।
पूजा विश्वकर्मा ने 6 साल पहले 40 हज़ार रुपये की लागत से मोती की खेती का व्यवसाय शुरु किया। लगातार 2 साल तक संघर्ष करने के बाद उन्हें सफलता मिली।
कड़कनाथ मुर्गी पालन (Kadaknath Chicken Farming): जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, वैसे-वैसे मुर्गियों की बढ़वार धीमी पड़ने लगती है क्योंकि वो आहार कम खाती हैं और पानी ज़्यादा पीती हैं। या यूँ कहें कि तापमान परिवर्तन से जूझने के लिए मुर्गियों को ज़्यादा ऊर्जा की ज़रूरत होती है। इसकी भरपाई प्रोटीन, अमीनो अम्ल और खनिज लवणयुक्त ऐसे आहार से ही हो सकती है जो सस्ता भी हो। अजोला इन सभी शर्तों पर कड़कनाथ मुर्गीपालन के आहार के रूप में ख़रा उतरता है।
भारत में गाय पालन (Cow Farming/Dairy farming) एक बेहतरीन व्यवसाय है। देसी गाय के दूध की पौष्टिकता को देखते हुए
आप तो जानते ही है कि बर्ड फ्लू कितनी तेजी से कई राज्यों में फैल चुका है। बर्ड फ्लू की
Sexed Semen, आनुवांशिक रूप से बेहतर और लाभदायक है। इसे उम्दा नस्ल के साँढ़ या भैंसा से हासिल किया जाता है। इससे गर्भाधान का विकल्प पशुपालकों को महँगा पड़ता है। क्योंकि पशु चिकित्सालयों में होने वाले सामान्य कृत्रिम गर्भाधान का दाम जहाँ क़रीब 50 रुपये है, वहीं आयातित Sexed Semen का दाम 1500 से लेकर 4000 रुपये तक बैठता है।
मुर्गीपालन की अन्य नस्लों के मुक़ाबले कड़कनाथ को पालना आसान और कम खर्चीला है, क्योंकि इन्हें बीमारियाँ कम होती हैं। इसका रखरखाव बॉयलर और देसी मुर्गी के मुक़ाबले आसान होता है। कड़कनाथ का माँस काफ़ी स्वादिष्ट होता है। इसमें आयरन और प्रोटीन की प्रचुरता तथा कोलेस्ट्रॉल यानी फैट बेहद कम होता है। कड़कनाथ का माँस, अंडा और चूजा, सभी की ख़ूब माँग है इसीलिए बढ़िया दाम मिलते हैं।
कर्नाटक के अलमेल गाँव के रहने वाले सोमन्ना सिद्दप्पा भसागी पहले सिर्फ़ गन्ने की ही किया करते थे। सूअर पालन (Pig Farming) का रूख उन्होंने 2014 में किया। कैसे हुआ इससे लाभ, जानिए इस लेख में।
दूध का उत्पादन, डेयरी व्यवसाय किसानों के लिए किस तरह फ़ायदे का बिज़नेस बन रहा है, इसको लेकर महिला किसान सरनजीत कौर ने किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत की। जानिए डेयरी फ़ार्मिंग (Dairy Farming) से जुड़ी उनकी कई सलाहों के बारे में।
पशुओं को ऐसा आहार खिलाने से बचना चाहिए जो हम खाते हैं। कभी-कभार रसोई में बची हुई रोटी या हरी सब्जी के छिलके वग़ैरह तो पशु आहार के रूप में खिलाये जा सकते हैं, लेकिन पशुओं को दूध, शहद, बादाम, किशमिश, देसी घी आदि महँगी खाद्य सामग्री खिलाना समझदारी नहीं है। इनसे पशुओं को कोई नुकसान भले ना हो, लेकिन फ़ायदा बिल्कुल नहीं होता।
गम्भीर ताप तनाव (heat stress) की वजह से पशुओं के शरीर का तापमान, दिल की धड़कनें, रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। चारे का सेवन 35 प्रतिशत तक कम हो सकता है। देसी नस्ल के पशु तो फिर भी ज़्यादा तापमान सहन कर लेते हैं लेकिन विदेशी और संकर नस्लों में इसे बर्दाश्त करने की क्षमता भी कम होती है।
ओस्मानाबादी बकरी (Osmanabadi Goat) पांव और मुंह की बीमारी (एफएमडी), गोट प्लेग (पीपीआर) जैसी कई बीमारियों का शिकार हो जाती है। उनसे बचाव और रखरखाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, जानिए इस लेख में विस्तार से।
किसान प्रवीण के पास 1.69 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि है। प्रवीण पहले सिर्फ़ रागी, मक्का, आलू और नारियल की खेती करते थे, जिससे उन्हें सालाना करीबन 47 हज़ार की कमाई होती थी। जानिए कैसे उन्होंने अपनी आमदनी में किया इज़ाफ़ा?
वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करके पशुपालक किसान अपनी कमाई को दोगुनी से तिगुनी तक बढ़ा सकते हैं। इसके लिए बकरी की उन्नत नस्ल का चयन करना, उन्हें सही समय पर गर्भित कराना और स्टॉल फीडिंग विधि को अपनाकर चारे-पानी का इन्तज़ाम करना बेहद फ़ायदेमन्द साबित होता है।
बेहद गरीबी में जीवन बसर करने वाले इस गांव के लोग सूअर पालन की बदौलत अब अपने परिवार के साथ बेहतर ज़िंदगी जी रहे हैं।
पिछले दो साल के अंदर ही करीबन हज़ार किसानों ने मिनी इनक्यूबेटर का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की मदद से मुर्गी पालन व्यवसाय में चूज़ों का उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने में बड़ी सफलता हाथ लगी।