डेयरी फ़ार्मिंग व्यवसाय की बारीकियों को अगर समझ लिया जाए तो ये किसानों के लिए अच्छी आमदनी का ज़रिया बन सकती है। शर्त सिर्फ ये है कि आपको इसमें अपना 100 फ़ीसदी देना होगा। दूध का व्यवसाय ऐसा है जो कभी मंदी या किसी संकट की चपेट में बहुत कम आता है । दूध और इससे बनने वाले बाई-प्रॉडक्ट्स (दूध, दही, छाछ और पनीर) की मांग बाज़ार में हमेशा रहती है। सरकार भी डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा दे रही है। डेयरी फ़ार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कई स्कीम्स भी सरकार लाई है। किसान छोटे स्तर पर भी डेयरी फार्मिंग (Dairy farming) को कृषि के सहायक व्यवसाय (subsidiary business) के रूप में अपनाकर आमदनी में इज़ाफ़ा कर सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत में अपने क्षेत्र में दुग्ध क्रांति लाने वाले भूपेंद्र पाटीदार ने कई अहम बाते बताईं। मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले के नांद्रा गाँव के रहने वाले भूपेंद्र पाटीदार ने जब डेयरी फ़ार्मिंग व्यवसाय शुरू किया था, तब उनके क्षेत्र में डेयरियां कम थीं और आज उनकी पहल से हर एक गाँव में चार-चार डेयरियां खुली हैं। इस लेख में हम आपको लोन लेने के उनके अनुभव और उनकी टिप्स के आधार पर लोन लेने से जुड़ीं अहम जानकारियां देंगे।

डेयरी फ़ार्मिंग के लिए क्या है बैंक से लोन लेने का भूपेंद्र का अनुभव?
भूपेंद्र पाटीदार ने एग्री क्लिनिक और एग्री बिजनेस सेंटर (AC&ABC), भोपाल से करीब दो महीने की ट्रेनिंग ली। भूपेंद्र ने डेयरी फ़ार्मिंग व्यवसाय में शुरुआत में ही नुकसान झेलना पड़ा था। मुर्रा नस्ल की दो भैंसों में से एक भैंस बीमार रहने लगी। एक लाख चालीस हज़ार में दो भैंसे वो खरीद कर लाए थे। बीस दिन के अंदर ही 20 हज़ार रुपये में एक भैंस को बेचना पड़ा। यानी सीधा 50 हज़ार का घाटा।
इसके बाद उन्होंने बैंक में लोन के लिए आवेदन किया। जहां से उन्होंने ट्रेनिंग ली यानी कि AC&ABC से ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाई। अगर आप डेयरी व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं तो AC&ABC ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करके देता है। इस रिपोर्ट को फिर आप बैंक में दिखाते हैं। प्रोजेक्ट रिपोर्ट लेकर करीबन एक साल तक भूपेंद्र ने बैंक के कई चक्कर लगाए। भूपेन्द्र बताते हैं कि आपको बस पीछे नहीं हटना है। जब बैंक वाले बुलाएं आपको पहुंच जाना है। उन्होंने खुद भी ऐसा ही किया।
भूपेंद्र पाटीदार का डेयरी फ़ार्मिंग बिज़नेस का पूरा प्रोजेक्ट 20 लाख का था। 20 लाख के प्रोजेक्ट में 4 लाख की वर्किंग कैपिटल बैंक को दिखानी पड़ती है और 16 लाख बैंक देता है। वर्किंग कैपिटल में भूपेंद्र ने अपनी भैंसों, उन्हें खिलाने वाले आहार और ट्रैक्टर का ब्योरा दिया। इस कर्ज पर सब्सिडी भी मिलती है।
भूपेंद्र बताते हैं कि लोन देने का हर बैंक का अपना प्रोसेस होता है। मान लीजिए आपने बैंक में भैंस खरीदने के लिए एक लाख रुपये मुहैया कराने का आवेदन किया है, तो लोन मंजूर कराने के लिए आपको पहले एक लाख रुपये का 20 फ़ीसदी बैंक में जमा कराना होगा। जैसे ही आप बैंक में एक लाख का 20 फ़ीसदी यानी कि 20 हज़ार रुपये जमा कराएंगे, वैसे ही भैंस बेचनेवाले के खाते में सीधा पैसा पहुंच जाएगा।

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आइये जानें क्या और कौन सी हैं डेयरी बिज़नेस के लिए लोन स्कीम्स:
स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया भी लाया डेयरी किसानों के लिए स्कीम
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भी डेयरी किसानों के लिए लोन की एक स्कीम लेकर आया है। इस स्कीम का नाम है YONO Krishi Dairy Loan Scheme। इस स्कीम को लेकर SBI ने कहा है कि योनो कृषि डेयरी लोन स्कीम से बैंक का लक्ष्य डेयरी किसानों को लोन देकर उनकी आवश्यकता को पूरा करना है। डेयरी किसान SBI YONO के माध्यम से योनो कृषि सफल डेयरी लोन स्कीम के तहत कॉरपोरेट टाई-अप में प्री-अप्रूव्ड लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। योनो कृषि सफल डेयरी लोन स्कीम को लेकर जानकारी देते हुए बैंक ने जानकारी दी कि ये डेयरी किसानों के लिए वित्तीय कवच की तरह है। इसमें कम ब्याज दर के साथ साथ कई और सुविधाएँ किसानों को मिलेंगी।
कैसे कर सकते हैं YONO Krishi Dairy Loan Scheme के लिए आवेदन?
SBI बैंक के अनुसार, योनो कृषि डेयरी लोन स्कीम में डेयरी किसानों की सभी ज़रूरतों के लिए लोन दिया जाता है। डेयरी किसान SBI YONO ऐप के ज़रिए लोन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इस सर्विस का लाभ उठाने के लिए SBI YONO ऐप डाउनलोड करना होगा। ऐप में आपको योनो कृषि विकल्प का चयन करना होगा। यहां से किसानों को सभी सर्विस का फायदा मिलेगा। योनो कृषि सफल डेयरी लोन स्कीम के बारे ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी बैंक में जाकर पता कर सकते हैं।
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— State Bank of India (@TheOfficialSBI) November 2, 2021
क्या है Dairy Entrepreneurship Development Scheme (DEDS)?
डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने का काम डेयरी उद्यमिता विकास योजना भी कर रही है। राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) की ओर से डेयरी उद्यमिता विकास योजना (Dairy Entrepreneurship Development Scheme) के तहत पशु खरीदने, डेयरी कारोबार के लिए लोन दिया जाता है। खास बात ये है कि इस क़र्ज़ पर सब्सिडी भी मिलती है।
DEDS योजना के तहत प्रोजेक्ट की लागत पर 25 फ़ीसदी तक की सब्सिडी दी जाती है। आरक्षित वर्ग के लिए सब्सिडी की राशि 33 फ़ीसदी है। ये सब्सिडी 10 पशुओं तक की डेयरी पर ही दी जाती है। अगर आप 10 पशुओं की डेयरी खोलना चाहते हैं तो आपको इसके लिए 10 लाख रुपये की ज़रूरत होगी। कृषि मंत्रालय की DEDS योजना में आपको लगभग 2.5 लाख रुपये की सब्सिडी मिल जाएगी। यह सब्सिडी नाबार्ड की तरफ से दी जाती है।

छोटे स्तर पर भी डेयरी व्यवसाय शुरू करने पर मिलता है लोन
अगर आप छोटे स्तर पर काम शुरू करना चाहते हैं तो आप 2 गाय या भैंस से डेयरी की शुरूआत कर सकते हैं। दो पशुओं में आपको 35 से 50 हज़ार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। ज़्यादा जानकारी के लिए आप जिले के नाबार्ड कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
मुद्रा लोन योजना भी दे रही डेयरी फ़ार्मिंग को बढ़ावा (Mudra Loan Scheme)
मुद्रा लोन योजना के तहत भी डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा मिल रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे, लघु और मध्यम व्यापार संगठनों ( MSME ) को वित्तीय सहायता देना है। इस योजना की मदद से कोई भी व्यक्ति अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए लोन ले सकता है। उनके बिज़नेस से आमदनी होने के बाद किस्तों में इस लोन का भुगतान किया जाता है।
डेयरी बिज़नेस शुरू करने के लिए कुल लागत मन लीजिए 16.5 लाख रुपये आती है तो इसमें से करीब 5 लाख रुपये का इंतजाम आवेदक को करना होगा। 70 फ़ीसदी की राशि मुद्रा स्कीम के तहत आवेदक को मिलती है। बैंक से टर्म लोन के तौर पर 7.5 लाख रुपये और वर्किंग कैपिटल के तौर पर 4 लाख रुपये मिल जाएंगे।
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