खेतों की निराई-गुड़ाई और कीटनाशकों का छिड़काव करने में किसानों को बहुत अधिक समय लगता है। इन कामों में श्रम यानी मेहनत भी अधिक लगती है। किसानों के लिए इन कामों के लिए मज़दूर ढूंढ़ना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सोलर असिस्टेड ई-प्राइम मूवर मशीन (Solar Powered E-Prime Mover Equipment) छोटे से लेकर बड़े किसानों तक के लिए बहुत फ़ायदेमंद है। इससे उनके समय की तो बचत होगी ही, साथ ही मज़दूरों की समस्या भी दूर होगी। मशीन कुछ ही घंटे में निराई-गुड़ाई से लेकर कीटनाशक छिड़कने तक का काम कुशलता से कर लेती है। कृषि के आधुनिकीकरण में यह कृषि यंत्र बहुत महत्वपूर्ण है।
कई आधुनिक उपकरणों से लैस ई-प्राइम मूवर मशीन
सोलर असिस्टेड ई-प्राइम मूवर को ICAR-Central Institute of Agricultural Engineering, Bhopal (केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल) ने विकसित किया है। इस मशीन की ख़ासियत है कि यह सौर उर्जा के साथ ही बैटरी से भी चल सकती है। इसमें डैशबोर्ड बैटरी मॉनिटरिंग सिस्टम, इमरजेंसी स्टॉप स्विच, डिजिटल स्पीड इंडिकेटर, लोड करंट और वोल्टेज मॉनिटरिंग सिस्टम, सेफ्टी स्विच और अन्य सभी सुरक्षा उपकरण लगे हुए हैं।

कम समय में कुशलता से काम
इस ई-प्राइम मूवर मशीन की मदद से सवा एकड़ क्षेत्र में सिर्फ़ एक घंटे मे ही दवा का छिड़काव किया जा सकता है। जबकि सवा एकड़ ज़मीन की जुताई और निराई-गुड़ाई का काम यह मशीन 5 घंटे में ही कर देती है।
घर के काम में इस्तेमाल
ई-प्राइम मूवर मशीन का इस्तेमाल घर में लाइट जलाने के लिए भी किया जा सकता है। सौर ऊर्जा से चार्ज हुई इसकी बैटरी से घर की लाइट जला सकते हैं। यह उपकरण 2 क्विंटल तक का भार उठा सकता है। यानी खेत से 2 क्विंटल अनाज आसानी से घर ले जा सकते हैं। अगर इसे बैटरी से चला रहे हैं तो फुल चार्ज करने पर बैटरी 3 घंटे चलती है।
ये भी पढ़ें: मल्टीक्रॉप बास्केट थ्रेशर बन रहा है किसानों का हमदम, पैसा भी बचाए और बर्बादी भी घटाए

सोलर असिस्टेड ई-प्राइम मूवर मशीन की ख़ासियत (Solar Powered E-Prime Mover Equipment)
- यह बिना ईंधन के चलता है। बैटरी या सोलर एनर्जी इसके लिए ज़रूरी है।
- बैटरी एक बार चार्ज होने के बाद 3 घंटे तक चलती है।
- इसके इस्तेमाल से पर्यावरण को कोई हानि नहीं पहुंचती।
- यह पूरी तरह से सुरक्षित है और कोई भी इसे चला सकता है।
- 2 क्विंटल तक अनाज का बोझ ढो सकता है।
- सौर ऊजा से चार्ज होने वाली बैटरी से आप घर की बिजली भी चला सकते हैं।
किसानों को होगी अधिक बचत
यह मशीन समय और श्रम की बचत तो करता ही है, साथ ही ईंधन की भी बचत करता है जिससे किसानों की खेती की लागत कम और मुनाफ़ा अधिक होता है।
कितनी है कीमत?
सौर पैनल के साथ Solar Assisted E-Prime Mover Machine की कीमत करीबन 3.10 लाख रुपये और बिना सौर पैनल के 1.80 लाख रुपये के आसपास है। इस ऑपरेटिंग लागत 500 रुपये प्रति घंटा है।
ये भी पढ़ें: Raised Bed Planter: जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में बेहद उपयोगी है कुंड और नाली विधि से बुआई
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- WWF Global Conservation Conference में जंगलों के साथ Grasslands और Wetlands बचाने पर ज़ोरWWF Global Conservation Conference में भूपेंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर ज़ोर दिया।
- बिना टच किये मछली का Measurement! ICAR-CMFRI का ‘MatsyaMetri’App बदल देगा Fisheries Research की तस्वीर‘MatsyaMetri’ को ARCore-supported Android devices के लिए डिजाइन किया गया है। ‘MatsyaMetri ‘ एक इमेज बेस्ड टूल है। यूज़र मछली की तस्वीर लेता है और ऐप अपने आप उसके आयामों का अनुमान लगाकर माप दर्ज कर लेता है।
- लखनऊ का मलिहाबादी दशहरी आम अब ग्लोबल पहचान की ओर, ODOP में होगा शामिलमलिहाबादी दशहरी आम की मांग अब 25 से अधिक देशों में है। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, सऊदी अरब और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह आम पहुंच रहा है।
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
- सिवनी का जम्बो सीताफल: जीआई टैग के साथ बदलेगी किसानों की तकदीर,इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरूसिवनी का जम्बो सीताफल (Seoni’s Jumbo Custard Apple) औसतन 200 से 650 ग्राम का होता है, लेकिन भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के मिलते हैं।
- World Circular Economy Forum 2026 में भारत की सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक चर्चाWorld Circular Economy Forum 2026 में 62 देशों के 3600 से अधिक stakeholders ने Circular Economy पर चर्चा की।
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: 32 साल इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक समझौता,जानिए किस राज्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभकिशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) की नींव 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते में रखी गई थी, लेकिन आर्थिक बोझ और राज्यों के हितों के टकराव ने इसे आठ साल तक ठप कर दिया।
- खेती के साथ मधुमक्खी पालन: पाएं 1.28 लाख का अनुदान,1.92 लाख रुपये की लागत में शुरू करें अपना ख़ुद का बिज़नेसमधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके लिए आपको बड़े खेत या अलग ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। आप अपने घर के आसपास, बगीचे में, पेड़-पौधों वाली जगह पर आसानी से यह यूनिट लगा सकते हैं।
- Google और Mitti Labs का बड़ा करार: धान के खेतों से मीथेन गैस की कटौती और पानी की बचतमिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है।
- CAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने सूखे में दिखाई शानदार सहनशीलता, 35 दिन तक बारिश न होने पर भी बनी रही फ़सलCAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने 35 दिन के सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन कर जलवायु अनुकूल खेती की उम्मीद बढ़ाई।
- ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज: ग्लोबल साउथ की फ़सल का असली मोल वापस पानाब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज से ग्लोबल साउथ के किसानों को फ़सल की क़ीमत तय करने में कैसे अधिक अधिकार और वैश्विक कृषि बाज़ार में नई भूमिका मिल सकती है, जानें।





















