प्राकृतिक खेती ने बढ़ाया गोवर्धन क्लांटा का आत्मविश्वास और मज़बूत की सेब की खेती
प्राकृतिक खेती अपनाकर गोवर्धन क्लांटा ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई आय और मिट्टी की सेहत को किया मज़बूत।
जैविक और प्राकृतिक खेती के फायदे और तकनीकों का अन्वेषण करें। स्वस्थ जीवन के लिए जैविक खेती के लाभ जानें। किसान ऑफ इंडिया पर हमारे गाइड के साथ स्वास्थ्यपूर्ण खेती की दुनिया में कदम बढ़ाएं।
प्राकृतिक खेती अपनाकर गोवर्धन क्लांटा ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई आय और मिट्टी की सेहत को किया मज़बूत।
सुखजीत सिंह ने 20 साल पहले शुरू की जैविक खेती, आज भरोसेमंद आलू बीज उत्पादन से किसानों को दे रहे बेहतर विकल्प।
प्राकृतिक खेती अपनाकर संजीव नेगी ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई गुणवत्ता और बनाई टिकाऊ खेती का सफल मॉडल।
प्राकृतिक खेती अपनाकर पवन शर्मा ने लागत घटाई, आमदनी बढ़ाई और अपने गांव में टिकाऊ खेती का मज़बूत उदाहरण पेश किया।
प्राकृतिक खेती (Natural Farming) अपनाकर सुरेंद्र पीरता ने सेब की खेती में ख़र्च घटाया, गुणवत्ता सुधारी और रसायन मुक्त फल उत्पादन की दिशा पकड़ी।
प्राकृतिक खेती अपनाकर प्रमोद देस्ता ने सेब की खेती में लागत घटाई, गुणवत्ता बढ़ाई और टिकाऊ खेती से बेहतर आमदनी हासिल की।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर राम प्रकाश पांडे ने FPO के माध्यम से हज़ारों किसानों को बेहतर उत्पादन, बाज़ार और मुनाफ़ा दिलाया।
छोटी जोत वाले किसान ही हैं जिन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा की डोर थाम रखी है, और अब वे जलवायु-लचीली कृषि (Climate-Resilient Agriculture – CRA) के ज़रिए दुनिया को रास्ता दिखा रहे हैं।
रिशु कुमारी ने प्राकृतिक खेती अपनाकर कम ख़र्च में अधिक आय पाई और महिला किसानों के लिए आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की।
विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर कम ख़र्च में अधिक आमदनी पाई, अब वे सैकड़ों किसानों को इस तकनीक से जोड़कर प्रेरित कर रहे हैं।
27 नवंबर 2025 को ‘किसान सम्मान 2025’ (Kisan of India Samman 2025)से सम्मानित सुरेंद्र अवाना से हुई इस ख़ास बातचीत के मुख्य अंश यहां पेश हैं।
अभिनेता राजेश कुमार ने Kisan of India Samman 2025 में किसानों को सम्मानित किया और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही।
धर्मशाला के किसान सुरेश कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर मिट्टी की रक्षा और आमदनी दोनों बढ़ाई, बन गए किसानों के प्रेरणा स्रोत।
हरदयाल शेषमा का Portable Farming System शहरी घरों में ऑर्गेनिक फ़ार्मिंग और ऑर्गेनिक सब्ज़ियां उगाने का आसान, आधुनिक समाधान प्रस्तुत करता है।
हिमाचल के किसान जीवन सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती अपनाकर ड्रैगन फ्रूट व सब्जियों से आमदनी बढ़ाई और रासायनिक खेती छोड़ दी।
Agroforestry (वानिकी कृषि) और Social Forestry (सामाजिक वानिकी) जैसे कॉन्सेप्ट केवल ऑप्शन नहीं, बल्कि एक ज़रूरी ज़रूरत बनकर उभरी हैं। ये वो जादू की छड़ी हैं जो किसान की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ धरती को हरा-भरा बनाने का काम कर रही हैं।
सरकार प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को प्रति फसल 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।
नॉर्थईस्ट भारत (Northeast India) में लंबे वक्त तक पारंपरिक खेती और उपज का सही बाज़ार न मिल पाने के कारण यहां के किसानों की स्थिति मज़बूत नहीं हो पा रही थी। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 2015-16 में ‘मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ ईस्टर्न रीजन’ (MOVCD-NER) की शुरुआत की।
श्रेष्ठा देवी ने प्राकृतिक खेती अपनाकर पहाड़ों में कम ख़र्च में अधिक मुनाफ़ा कमाने की मिसाल पेश की है, जिससे कई महिलाएं प्रेरित हो रही हैं।
कांगड़ा ज़िला प्राकृतिक खेती में नई मिसाल बन रहा है, जहां किसान देशी तरीकों से कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफ़ा कमा रहे हैं।