छत्तीसगढ़ के पशुपालकों को लाभ पहुंचाने के लिए राज्य में गोधन न्याय योजना चलाई जा रही है। योजना के अंतर्गत राज्य सरकार गाय पालने वाले पशुपालकों से गोबर की खरीदी करती है। पशुपालकों से खरीदे गए गोबर का इस्तेमाल वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किया जाता है। राज्य के पशुपालकों को इस योजना का सीधा लाभ मिलता है। अब अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को छत्तीसगढ़ सरकार एक और कदम आगे ले जा रही है।
सोलर की बजाय ग्रीन एनर्जी से राज्य होगा रोशन
इस योजना के अंतर्गत अब छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर से बिजली बनाने का फैसला किया है। अब गोबर से बिजली तैयार कर ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से परेशान है। हर तरफ ग्रीन एनर्जी को लेकर चर्चा हो रही है, ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार ने गोबर से बिजली बनाने का निर्णय लिया है। इससे पशुपालकों के साथ-साथ गोठानों और उद्योगों को भी फ़ायदा पहुंचेगा।
गोबर से बिजली का उत्पादन होने से छत्तीसगढ़ में ज्यादा ऊर्जा उत्पादन होगा, जिसका लाभ औद्योगिक विस्तार के रूप में भी मिलेगा। ज़्यादा से ज़्यादा उद्योग खुलेंगे, जिससे युवाओं के रोजगार के अवसर प्रबल होंगे। साथ ही गोबर क्रय करने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लाभ होगा।
100 करोड़ रुपये से ज़्यादा गोबर की खरीद
बात दें कि छत्तीसगढ़ दो रुपए किलो में गोबर खरीदी करने वाला देश का पहला राज्य है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने साल 2020 में गोधन न्याय योजना की शुरुआत की थी। राज्य सरकार ने एक साल में 50 लाख क्विंटल गोबर यानी 100 करोड़ रुपये से अधिक की गोबर खरीद कर चुकी है। हाल ही में संसद की स्थाई समिति की 13 सदस्यीय टीम गोधन न्याय योजना का निरीक्षण करने छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर भी गई थी। समिति ने इस योजना को देशभर में लागू करने तक की सिफारिश की है।
छत्तीसगढ़ सरकार की इस गोधन न्याय योजना को स्काच गोल्ड अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। अब अगर गोबर से ग्रीन एनर्जी विकसित करने की नई योजना को सफलता से लागू किया जाता है तो एक और मुकाम हासिल किया जा सकेगा।

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