खेती के साथ-साथ देश में पशुपालन और मुर्गीपालन तेजी से उभरा है। पशुपालन की तरह ही मुर्गीपालन साल के 12 महीने आय देने वाला व्यवसाय है। अंडे की बढ़ती मांग को देखते हुए मुर्गी पालन अच्छी कमाई वाला रोजगार बन रहा है। मुर्गीपालन व्यवसाय खेती के साथ आसानी से किया जा सकता है। ऐसे किसान जिनके पास कम ज़मीन है या फिर जो भूमिहीन हैं, वो इस काम को करके अच्छा मुनाफ़ा कमा सकते हैं। इस काम को कम जगह और कम खर्च पर किसान शुरू कर सकते हैं। आजकल देसी मुर्गी पालन का व्यवसाय बहुत तेजी से चलन में है। कर्नाटक के तुमकुर जिले के भीम राजू फ़्री रेंज पद्धति से बैकयार्ड मुर्गीपालन करते हैं।

फ़ार्म और फ़्री रेंज में मुर्गीपालन करने में अंतर
फ्री रेंज में मुर्गियों को खुला वातावरण मिलता है। भीम राजू बताते हैं फ़ार्म और फ़्री रेंज में मुर्गी पालन करने में अंतर होता है। फ़ार्म की मुर्गियों को घूमने टहलने के लिए जगह नहीं मिल पाती, लेकिन फ़्री रेंज में मुर्गियों को खुली जगह मिलती है, जहां वो आराम से घूम सकती हैं। भीम राजू कहते हैं कि इस तरह खुला वातावरण मिलने से मुर्गियों की एक्सरसाइज़ होती है और वो दुरुस्त रहती हैं। भीम राजू बताते हैं कि फ्री रेंज यानि कि खुले माहौल में मुर्गीपालन करने से मुर्गियों को गंभीर बीमारी होने का खतरा कम रहता है क्योंकि ये सीधा प्रकृति से अपना आहार लेती हैं और इसके बीच ही पलती हैं।

सही वातावरण और अच्छा पोषण मिलना बेहद ज़रूरी
इन मुर्गियों को सही वातावरण और पोषण मिलन बेहद ज़रूरी है। भीम राजू ने अपने वहां पपाया की खेती भी की हुई है। पपाया की फसल में जो लगने वाले कीट होते हैं ये मुर्गियां उन्हें खा जाती हैं। इस तरह से इन्हें पोषक तत्व तो मिलता ही है साथ ही ये फसल को नुकसान से भी बचाती हैं। वहीं मुर्गियों के वेस्ट को खाद के रूप में इस्तेमाल में लाया जाता है। भीम राजू बैकयार्ड मुर्गीपालन करते हैं। बैकयार्ड मुर्गीपालन यानि घर के पीछे या आंगन की ऐसी जगह जो खाली पड़ी हो, वहां मुर्गीपालन किया जा सकता है।

एक अंडे की कीमत 8 से 10 रुपये
भीम राजू ने देसी नस्ल की मुर्गियां पाली हुई हैं। वो बताते हैं कि लोकल मुर्गी के अंडे का बाज़ार में अच्छा दाम मिलता है। उत्पादन से ज़्यादा मांग रहती है। एक मुर्गी साल में 100 अंडे देती है तो 100 मुर्गी से 10 हज़ार अंडे साल में आते हैं। एक अंडा 8 से 10 रुपये का बिकता है। इस तरह से 200 मुर्गी पालने पर साल में 2 लाख तक की कमाई हो जाती है।

मुर्गीपालन में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
भीम राजू बताते हैं कि बैकयार्ड मुर्गीपालन के कई फायदे हैं तो कुछ सावधानियां भी बरतनी होती है। मसलन बैकयार्ड मुर्गीपालन में मुर्गियों को अन्य जानवरों से खतरा रहता है। इसके लिए भीम राजू ने क्षेत्र को चारों ओर 5 फ़ीट की जाली डाली हुई है। इससे न ये मुर्गियां बाहर जा सकती हैं और न कोई अन्य जानवर अंदर आ सकता है।

बहुरंगी मुर्गियों को पालें
बैकयार्ड मुर्गीपालन के कई लाभ हैं तो कुछ नुकसान भी हैं। बैकयार्ड मुर्गीपालन में पालकों को कई अहम बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, मसलन किस नस्ल की, कौनसे रंग की मुर्गी को पाले। बेंगलुरु स्थित केंद्रीय कुक्कुट विकास संगठन और प्रशिक्षण संस्थान के उप निदेशक डॉ. प्रताप कुमार बताते हैं कि बैकयार्ड मुर्गीपालन में सफेद मुर्गी नहीं पालनी चाहिए क्योंकि इन्हें अन्य जानवरों और पक्षियों द्वारा आसानी से शिकार बनाया जा सकता है। बैकयार्ड मुर्गीपालन के लिए बहुरंगी मुर्गियां सबसे सही है, क्योंकि ये वातावरण के रंग रूप के साथ घुल मिल जाती है, वहीं सफेद मुर्गी अलग से ही नज़र आती है।

मुर्गीपालन में पहले तीन से चार हफ़्ते बेहद अहम
डॉ. प्रताप कुमार कहते हैं कि किसान सोचते हैं ये चूजे बैकयार्ड फ़ार्मिंग के लिए सही हैं, वो एक दिन पहले पैदा हुए चूजों को खरीद लेते हैं और उन्हें बैकयार्ड में छोड़ देते हैं। ऐसे में इन चूजों की मृत्यु दर 80 से 85 प्रतिशत होगी। पहले तीन से चार सप्ताह तक उन्हें मादा द्वारा देखभाल की ज़रूरत होती है। मादा अंडे पर बैठ उन्हें गर्माहट देती हैं। जब चूजे बाहर आते हैं तो मादा उनकी देखभाल करती हैं। कोई पक्षी आता देख वो झुककर अपने पंखों से अपने बच्चों की रक्षा करती हैं। गिद्ध को आता देख मुर्गियां अपने बच्चों को लेकर झाड़ियों में चली जाती हैं। इन सब के अभाव में मुर्गीपालक की ज़िम्मेदारी है कि वो उसका अच्छे से पालन-पोषण करे। पहले चार हफ्तों में चूजों को घर के अंदर रखना चाहिए, उन्हें संतुलित आहार और पूरा रखरखाव दें।

अच्छा आहार और टीकाकरण का रखें ध्यान
डॉ. प्रताप कुमार कहते हैं कि जो किसान बैकयार्ड मुर्गीपालन करना चाहते हैं, वो एक ग्रुप बनाएं, अपने में से ही किसी एक को चुने, जिसके पास मुर्गीपालन करने की बुनियादी सुविधा हो। एक दिन पहले पैदा हुए सभी चूजों की देखभाल की ज़िम्मेदारी उसको दें। चार हफ़्ते चूजों को घर के अंदर ही रखें, अच्छा आहार, टीकाकरण, उसका पूरा रखरखाव करें। फिर चार हफ़्ते बाद दिन में उन्हें बाहर निकालें और उन्हें खुद से अपना खाना ढूंढने दें। छठे हफ़्ते तक वो खुद अपना खाना ढूंढने के लिए तैयार हो जाएंगे। छठे हफ़्ते में ही उन्हें दूसरी वैक्सीन लगवाएं। अगर किसान मुर्गीपालन से जुड़ी इन सभी बातों का ख्याल रखें तो उन्हें अच्छी आय और मुनाफ़ा अर्जित हो सकता है।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- तने की मजबूती: पौधे खुद को सीधा कैसे रखते हैं ? लिग्निन, पोटाश, नाइट्रोजन का समय और फसल गिरने का असली विज्ञानफसल का तना कोई साधारण डंडी नहीं है। यह एक जीवित ढांचा है जो पौधे को सीधा खड़ा रखता है और पानी व भोजन का परिवहन करता है। तना पत्तियों, फूलों और दानों को ऊपर संभालता है।
- पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: 50 साल बाद मिलेगा ‘कच्चे’ किसानों को हक, बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएगा पैसापंजाब सरकार (Punjab Government) ने किसानों और गरीबों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। इन फैसलों से जहां सैकड़ों ऐसे किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी फसलें बाढ़ में (Punjab farmers will get compensation for crop loss ) बर्बाद… Read more: पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: 50 साल बाद मिलेगा ‘कच्चे’ किसानों को हक, बाढ़ पीड़ितों के खाते में आएगा पैसा
- तेलंगाना में रिकॉर्ड स्तर पर कपास की खरीद, 12,823 करोड़ रुपये किसानों के खाते मेंतेलंगाना में 12,823 करोड़ रुपये की कपास की खरीद, 27 फरवरी तक खुला बाजार, किसानों को उपज बेचने में बड़ी सहूलियत।
- Holi And Indian Farming : केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत का जश्न है होलीहोली का त्योहार (Holi festival) सिर्फ रंगों का ही नहीं, बल्कि खुशियों और मेहनत के रंगों का भी (Holi and Indian farming) त्योहार है। और इस खुशी में सबसे आगे होते हैं हमारे अन्नदाता किसान भाई।
- मिलावट के खिलाफ जंग: FSSAI के ‘Food Safety on Wheels’ से हर गांव-गली में होगी डेयरी प्रोडक्ट्स की जांचFSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) पहल है ‘Food Safety on Wheels’ । ये कोई आम सरकारी गाड़ी नहीं, बल्कि चलती-फिरती हाईटेक लैब है, जो 24 घंटे आपके आसपास के इलाकों में घूमकर लोगों को शुद्ध दूध-घी का अधिकार दिला रही है।
- नई दिल्ली में आयोजित होगा पूसा कृषि विज्ञान मेला 2026, किसानों को मिलेंगे नई तकनीक और समाधानपूसा कृषि विज्ञान मेला 2026 में किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक समाधान की जानकारी मिलेगी, जिससे खेती बनेगी अधिक लाभकारी।
- नैनो फर्टिलाइज़र क्यों है नई ज़माने की खेती की ज़रूरत, जानिए IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार सेखेती में यूरिया, डीएपी और नैनो यूरिया/डीएपी की बहुत अहम भूमिका होती है और भारतीय किसानों को इसकी आपूर्ति करता है भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (IFFCO), जो दुनिया की सबसे बड़ी उर्वरक सहकारी संस्थाओं में से एक है। किसान ऑफ़ इंडिया से खास बातचीत में IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार ने कृषि… Read more: नैनो फर्टिलाइज़र क्यों है नई ज़माने की खेती की ज़रूरत, जानिए IFFCO के मार्केटिंग डायरेक्टर डॉ. योगेंद्र कुमार से
- Godhan Samagam-2026 : उत्तर प्रदेश में गौ-संरक्षण और किसानों के सम्मान का भव्य आयोजनपशुपालन और दुग्ध विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘गोधन समागम-2026’ (‘Godhan Samagam-2026’) महज एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि योगी सरकार की उस महत्वाकांक्षी सोच का आईना है।
- महाराष्ट्र ने बनाई देश में पहली बार किसानों के लिए ख़ास ‘Agriculture AI’नीति, खर्च होंगे 500 करोड़मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में राज्य ने ‘Agriculture AI’ के क्षेत्र में देश में पहल करते हुए एक ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित किया है, जिसका सीधा फायदा सबसे छोटे किसान तक को होगा।
- US Tariff: अमेरिका ने फिर बढ़ाया टैरिफ,10 से बढ़ाकर 15 फीसदी किया, भारत के किसान और कृषि पर क्या होगा असर ?अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) ने हाल ही में Trump के पुराने व्यापक टैरिफ को 6-3 के बहुमत से गैरकानूनी ठहरा दिया था। अदालत ने कहा था कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों का अतिक्रमण (Encroachment) किया है।
- बदलते मौसम में अब नहीं होगा नुकसान, अब AI तय करेगा कब बोएं, कब सींचें और कहां बेचें फसल!अब AI खेत-खलिहान में उतरकर किसानों की तकदीर बदलने वाला है। केंद्रीय कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी (Union Agriculture Secretary Devesh Chaturvedi) ने हाल ही में ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ (India AI Impact Summit) में इस क्रांतिकारी बदलाव का खुलासा किया।
- भारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर चर्चा के जरिए दोनों देशों ने मज़बूत की साझेदारीभारत-ब्राजील कृषि सहयोग पर चर्चा में दोनों देशों ने तकनीक, शोध और टिकाऊ खेती में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति जताई।
- प्राकृतिक खेती ने बढ़ाया गोवर्धन क्लांटा का आत्मविश्वास और मज़बूत की सेब की खेतीप्राकृतिक खेती अपनाकर गोवर्धन क्लांटा ने सेब की खेती में घटाई लागत, बढ़ाई आय और मिट्टी की सेहत को किया मज़बूत।
- बिहार की ‘Sugarcane Mechanization Scheme’ बनी किसानों के लिए वरदान, सरकार दे रही है 60 फीसदी तक सब्सिडीबिहार के गन्ना उद्योग विभाग (Sugarcane Industry Department) की महत्वाकांक्षी ‘गन्ना यंत्रीकरण योजना’ (‘Sugarcane Mechanization Scheme) के तहत राज्य के 324 किसानों को मशीन ख़रीदने की परमिट जारी की गई है, जिसमें से 300 से ज़्यादा किसान मशीनें खरीद भी चुके हैं।
- 20 साल पहले शुरू की जैविक खेती, आलू के बीजों में माहिर किसान सुखजीत सिंहसुखजीत सिंह ने 20 साल पहले शुरू की जैविक खेती, आज भरोसेमंद आलू बीज उत्पादन से किसानों को दे रहे बेहतर विकल्प।
- यूपी की योगी सरकार का किसानों को तोहफ़ा: 70 करोड़ से बदलेगी कृषि की तस्वीर, हर गांव पहुंचेगी टेक्नोलॉजीयोगी सरकार ने केवल घोषणाएं ही नहीं की, बल्कि 70 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि (Amount of more than Rs 70 crore) सीधे तौर पर उन योजनाओं के लिए आवंटित की है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी कृषि को मज़बूती देंगी।
- नौकरी छोड़कर शुरू की सब्जियों की नर्सरी, अमृतसर से पंजाब के किसानों तक पहुंचा रहे पौधेसब्जियों की नर्सरी से किसान मज़बूत शुरुआत कर रहे हैं, अमृतसर के भूपिंदर सिंह गिल की सफल पहल से बढ़ रही है मांग और मुनाफ़ा।
- शिवराज सिंह चौहान का स्पष्ट संदेश कृषि और किसानों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताशिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी व्यापार समझौते में किसानों के हितों से समझौता नहीं होगा, खाद्यान्न और डेयरी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
- Madhya Pradesh Budget 2026: किसानों की झोली भरी, ‘किसान कल्याण वर्ष’ घोषित, जानें हर बड़ी बातमध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government of Madhya Pradesh) ने आज 18 फरवरी 2026 को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026 का बजट (Madhya Pradesh Budget 2026) पेश कर दिया।
- Journal Nature Climate Change का ख़ुलासा: खेती से भी बढ़ रहा प्रदूषण, भारत भी इस लिस्ट में शामिलप्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल (Journal) Nature Climate Change में प्रकाशित एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट (New international report) ने खेती को लेकर ग्लोबल टेंशन बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में खेतों से निकलने वाली हार्मफुल गैसों के लिए सिर्फ छह देश जिम्मेदार हैं, और इनमें भारत का नाम भी शामिल है।





















