चौलाई की खेती ज़्यादा ठंडे इलाकों में करना संभव नहीं है। इसे गर्मी और बरसात के मौसम में उगाया जा सकता हैं। गर्मी वाली फसल से अपेक्षाकृत बेहतर उपज मिलती है, क्योंकि चौलाई की फसल जलभराव के अनुकूल नहीं मानी जाती। चौलाई की खेती में ज़्यादा सिंचाई की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। गर्मियों वाली चौलाई की रोपाई फरवरी के अन्त में करते हैं तो बरसात वाली फसल के लिए अगस्त-सितम्बर का वक़्त सबसे सही माना जाता है।
चौलाई को कई मिनरल्स गुणों का खजाना भी कहा जाता है। प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी, आयरन,कैल्शियम और फॉस्फोरस से भरपूर चौलाई सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है। क्या आपने कभी लाल साग खाया है? जी हां, इस साग को ही चौलाई या राजगिरा कहा जाता है। राजगिरा का आटा तो यकीनन आपने व्रत में इस्तेमाल किया होगा, यह आटा चौलाई के बीजों से बनाया जाता है। इसे अंग्रेज़ी में आमारान्थूस Amaranthus या Amaranth कहा जाता है। कई नामों से जानी जाने वाली चौलाई की किस्में भी कई हैं। इसकी कुछ उन्नत किस्मों की खेती से अच्छी पैदावार होती है जिससे किसानों को अधिक मुनाफा होगा। आइए, जानते हैं गुणों का खज़ाना, चौलाई की कुछ किस्मों के बारे में:
1. अन्नपूर्णा- चौलाई की यह किस्म पहाड़ी इलाकों के लिए अच्छी मानी जाती है। इसके पौधे की ऊंचाई करीब 2 मीटर होती है। इस किस्म की चौलाई का साग बहुत अच्छा होता है और बीज बोने के करीब 30 से 35 दिन बाद ही यह कटाई के लिए तैयार हो जाती है। प्रति हेक्टेयर इसका उत्पादन करीब 22.50 क्विंटल है।

2. पी.आर.ए.-1- यह किस्म भी अधिक पैदावार देती है और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए ज़्यादा उपयुक्त है। इस किस्म के बीज़ों में 13-15 प्रतिशत प्रोटीन और 9.5 प्रतिशत तेल होता है। इसकी औसत पैदावार 14.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
3. पी.आर.ए.-2- यह किस्म भी पहाड़ी क्षेत्रों के लिए खासतौर पर तैयार की गई है। इसके पौधों की लंबाई करीब 138 सेंटीमीटर होती है और फसल 133 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। है। इसकी औसत पैदावार 14.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म के बीज़ों में 14-15 प्रतिशत प्रोटीन और 12 प्रतिशत तेल होता है।

4. पी.आर.ए.-3- पहाड़ी इलाकों के लिए उपयुक्त अधिक पैदावार वाली इस किस्म के पौधों की लंबाई करीब 140 सेंटीमीटर होती है और फसल 135 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसत पैदावार 16.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। एक और अच्छी बात यह है कि इस किस्म पर रोग व कीड़ों का असर नहीं होता है।
5. दुर्गा- अधिक पैदावार वाली यह किस्म जल्दी तैयार भी हो जाती है। इस किस्म के पौधों की लंबाई करीब 170 सेंटीमीटर होती है और सिर्फ 125 दिन में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसत पैदावार 21.0 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म पर रोग व कीड़ों का असर नहीं होता है।
6. वी.एल. चुआ 44- चौलाई की यह अगेती किस्म 110-120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। पहाड़ी इलाकों में इस किस्म की फसल अच्छी होती है। प्रति हेक्टेयर इसका उत्पादन 13.20 क्विंटल है।

7. गुजरात अमरेंथ 1- चौलाई की यह किस्म कम समय में अधिक पैदावार के लिए जानी जाती है। फसल 100-110 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। इसकी औसत पैदावार 19.50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म पर भी रोग व कीड़ों का प्रभाव नहीं होता है। मैदानी इलाकों के लिए यह किस्म अच्छी है।
8. सुवर्णा- उत्तर भारत में इस किस्म की खेती अधिक होती है। इसकी फसल जल्द पककर तैयार हो जातीहै। बीज बोने के 80-90 दिनों के अंदर यह तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, उड़ीसा, तमिलनाडू और गुजरात में खेती के लिए यह किस्म उपयुक्त है।
9. गुजरात अमरेंथ 2- यह किस्म गुजरात अमरेंथ 1 से अगेती है और मैदानी इलाकों के लिए उपयुक्त है। इसकी खासियत है कि फसल जल्दी तैयार हो जाती है और पैदावार भी अधिक है। महज़ 90 दिनों में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन 23 क्विंटल है।

10. कपिलासा- चौलाई की यह भी एक उन्नत किस्म है जिसमें फसल जल्दी तैयार हो जाती है। बुवाई के 95 दिनों बाद फसल कटने के लिए तैयार हो जाती है। इस किस्म के पौधों की लंबाई 165 सेंटीमीटर होती है और प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता 13.50 क्विंटल। उड़ीसा, तमिलनाडू, कर्नाटक आदि के लिए यह किस्म अच्छी मानी जाती है।

चौलाई की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त मानी जाती है और इसकी अच्छी पैदावार गर्म मौसम में ही होती है। सर्दियों का मौसम चौलाई की खेती के लिए अच्छा नहीं होता है।
अगर हमारे किसान साथी खेती-किसानी से जुड़ी कोई भी खबर या अपने अनुभव हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो इस नंबर 9599273766 या Kisanofindia.mail@gmail.com ईमेल आईडी पर हमें रिकॉर्ड करके या लिखकर भेज सकते हैं। हम आपकी आवाज़ बन आपकी बात किसान ऑफ़ इंडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाएंगे क्योंकि हमारा मानना है कि देश का किसान उन्नत तो देश उन्नत।

ये भी पढ़ें:
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पर्यावरण और जलवायु कार्रवाई को लेकर सहयोग पर दिया ज़ोरद्रौपदी मुर्मू ने NGT कॉन्फ्रेंस में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर ज़ोर दिया।
- केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय का बड़ा ऐलान: रेशम उत्पादक किसानों की बढ़ेगी आमदनी,’सर्वश्रेष्ठ रेशम किसान पुरस्कार’ की शुरुआत की घोषणासरकार की रणनीति सीधी और वैज्ञानिक है। शहतूत के पत्तों की पैदावार बढ़ाकर और रेशम के कीड़ों के पालन-पोषण के राउंड को बढ़ाकर किसानों की आमदनी 10 से 12 लाख रुपये तक ले जाने का टारगेट है।
- पराली जलाने पर केंद्र सख़्त: ज़मीन के रिकॉर्ड में 15 महीने तक दर्ज रहेगा नाम, दोबारा जलाने पर और कड़ी कार्रवाई!ये नियम दिल्ली-एनसीआर और आसपास के उन इलाकों में लागू होगा जहां पराली जलाने की घटनाओं का असर दिल्ली की हवा पर पड़ता है।
- Samriddh Vidisha Model: तैयार हुआ ग्रामीण गरीबी को जड़ से ख़त्म करने के लिए नया रोडमैपSamriddh Vidisha Model की सबसे बड़ी ख़ूबी है कि आमदनी के एक नहीं, कई साधन है। किसानों को आधुनिक खेती के साथ दूध, बकरी, मुर्गी और मधुमक्खी पालन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक सोर्स रुकने होने पर परिवार न बिखरे।
- दक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों को समय पर लक्ष्य पूरा करने के निर्देशदक्षिणी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन 2026 में राज्यों से Farmer ID, AgriStack और कृषि लक्ष्यों को तय समय में पूरा करने को कहा गया।
- Mahila Shetkari Portal: महाराष्ट्र सरकार का ऐतिहासिक कदम,अब खेत में काम करने वाली हर महिला बनेगी ‘किसान’अधिनियम के अनुसार, महिला को किसान मानने का आधार सिर्फ ज़मीन का मालिकाना हक नहीं, बल्कि खेती में उसकी ‘वास्तविक भागीदारी’ होगी।
- Soil Carbon Payments से किसानों को अतिरिक्त आय की नई पहलSoil Carbon Payments के ज़रिए पंजाब और हरियाणा के 2500 से ज़्यादा किसानों को 2.9 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान मिलेगा।
- Reimagining Indian Agriculture रिपोर्ट में ख़ुलासा : देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन बंजर!देश के कुल भू-भाग का लगभग 33 फीसदी ज़मीन ख़राब हो रही है। रिपोर्ट में ICAR-Indian Institute of Soil Science के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
- त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद: सरकार घटा सकती है खाद्य तेल पर आयात शुल्कभारत अपनी खाद्य तेल की ज़रूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा करता है। ये आयात मुख्य रूप से मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन से होता है।
- बिहार में बाढ़ से फ़सल नुक़सान का जायज़ा लेने पहुंचे शिवराज सिंह चौहानशिवराज सिंह चौहान ने बिहार में बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायज़ा लिया और किसानों को केंद्र से हर संभव मदद का भरोसा दिया।
- सिवनी का जम्बो सीताफल: जीआई टैग के साथ बदलेगी किसानों की तकदीर,इंटरनेशनल मार्केट से जोड़ने की तैयारी शुरूसिवनी का जम्बो सीताफल (Seoni’s Jumbo Custard Apple) औसतन 200 से 650 ग्राम का होता है, लेकिन भूतबंधानी क्षेत्र में कई फल 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक के मिलते हैं।
- World Circular Economy Forum 2026 में भारत की सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक चर्चाWorld Circular Economy Forum 2026 में 62 देशों के 3600 से अधिक stakeholders ने Circular Economy पर चर्चा की।
- किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना: 32 साल इंतज़ार के बाद ऐतिहासिक समझौता,जानिए किस राज्य को मिलेगा सबसे बड़ा लाभकिशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) की नींव 1994 के ऊपरी यमुना जल समझौते में रखी गई थी, लेकिन आर्थिक बोझ और राज्यों के हितों के टकराव ने इसे आठ साल तक ठप कर दिया।
- खेती के साथ मधुमक्खी पालन: पाएं 1.28 लाख का अनुदान,1.92 लाख रुपये की लागत में शुरू करें अपना ख़ुद का बिज़नेसमधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी ये है कि इसके लिए आपको बड़े खेत या अलग ज़मीन की ज़रूरत नहीं है। आप अपने घर के आसपास, बगीचे में, पेड़-पौधों वाली जगह पर आसानी से यह यूनिट लगा सकते हैं।
- Google और Mitti Labs का बड़ा करार: धान के खेतों से मीथेन गैस की कटौती और पानी की बचतमिट्टी लैब्स अपनी ‘Geo-AI’ Technology का इस्तेमाल कर रही है, जिसे नासा के सहयोग से विकसित किया गया है।
- CAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने सूखे में दिखाई शानदार सहनशीलता, 35 दिन तक बारिश न होने पर भी बनी रही फ़सलCAZRI Moth Bean की क़िस्मों ने 35 दिन के सूखे में भी बेहतर प्रदर्शन कर जलवायु अनुकूल खेती की उम्मीद बढ़ाई।
- ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज: ग्लोबल साउथ की फ़सल का असली मोल वापस पानाब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज से ग्लोबल साउथ के किसानों को फ़सल की क़ीमत तय करने में कैसे अधिक अधिकार और वैश्विक कृषि बाज़ार में नई भूमिका मिल सकती है, जानें।
- BRICS Summit 2026 : कृषि में AI, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं से किसानों, कारोबारियों को होगा लाभBRICS देशों के लिए Early Warning Data Integration Guidelines तैयार की गई हैं। इसका मकसद बाढ़, चक्रवात या भूकंप जैसी आपदाओं से पहले देशों के बीच डेटा साझा करना है
- आंध्र प्रदेश सरकार का पोल्ट्री फार्मस के लिए 657 करोड़ का तोहफ़ा, ब्याज से लेकर बिजली तक सब सस्ताशहरी क्षेत्रों में पोल्ट्री शेड बनाने पर लगने वाले डेवलपमेंट और बेटरमेंट चार्ज से छूट दी गई है। ग्राम पंचायतों के बराबर कम शुल्क पर मंज़ूरी मिलेगी।
- शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को 3.65 लाख नए PM आवासों की दी सौगात, 2 लाख परिवारों का हुआ गृह प्रवेशशिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ को 3.65 लाख नए PM आवास, सक्ती में KVK और बस्तर में आवास सर्वे की समयसीमा बढ़ाने की सौगात दी।





















