मालाबार नीम की खेती: हमारे देश में बहुत से ऐसे पेड़-पौधे हैं जिसमें न सिर्फ औषधीय गुण है, बल्कि उसकी लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने से लेकर ईंधन के रूप में किया जाता है और ऐसे पेड़-पौधे लगाकर किसान अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। मगर अफसोस की किसानों को इन पेड़-पौधों के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है, जिससे उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाता।
औषधिय गुणों वाला ऐसा ही एक बहुपयोगी पौधा है मिलिया दुबिया (Melia dubia) जिसे मालाबार नीम, घोड़ा नीम और महानीम आदि नाम से जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे पूरे देश में उगाया जा सकता है, क्योंकि ये गर्मी से लेकर ठंडी जलवायु तक में आसानी से उग जाता है। मिलिया दुबिया की खेती किसानों के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती है आइए, जानते हैं।
मिलिया दुबिया के उपयोग
मिलिया दुबिया एक बहुपयोगी पौधा है। इसकी पत्तियां पशुओं को खिलाने के काम आती है, जबकि इसकी लकड़ी का इस्तेमाल फर्नीचर बनाने से लेकर अन्य सामान बनाने तक और निर्माण कार्यों में भी किया जाता है।
गांवों में आज भी ईंधन के रूप में लकड़ी जलाई जाती है, मिलिया दुबिया की लकड़ी का ईंधन के रूप में भी उपयोग किया जा सकता है। मिलिया दुबिया औषधीय गुणों से भरपूर है और इसकी पत्तियां नीम की तरह ही दिखती हैं। इसका उपयोग वायरस से होने वाली त्वचा, पेट, आंखों की समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियों में किसी भी तरह के संक्रमण को रोकने की क्षमता होती है।

क्या है इसकी खासियत
मिलिया दुबिया की खेती किसानों के लिए हर तरह से फायदेमंद होगी। इसकी लकड़ी बेचकर, पशु चारे के रूप में पत्तों का इस्तेमाल करने के साथ ही कीटनाशकों पर होने वाला उनका खर्च भी बच जाएगा। दरअसल, मिलिया दुबिया को दूसरी फसलों के साथ भी उगाया जा सकता है और जब इसके पत्ते दूसरी फसलों पर गिरते हैं तो बीमारी का प्रकोप कम हो जाता है, क्योंकि यह कीटनाशक का काम करता है।
यही नहीं यह प्राकृतिक पॉली हाऊस का भी काम करता है। इसका पौधा हर महीने लगभग 1 फीट तक बढ़ता है और इसकी लंबाई 3 साल में लगभग 36 फीट तक हो जाती है। मिलिया दुबिया 5 से 6 साल में तैयार हो जाता है।
मिट्टी और जलवायु
वैसे तो मिलिया दुबिया की खेती हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है, लेकिन इसकी अच्छी पैदावार के लिए सूखी लाल, लाल दोमट, जलोढ़ और काली मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। पौधों के अच्छे विकास के लिए 30-35 डिग्री तापमान की ज़रूरत होती है, लेकिन 0 से 45 डिग्री तापमान तक में इसकी खेती की जा सकती है।

खेत की तैयारी और रोपाई
मालाबार नीम की रोपाई से पहले खेत की 2-3 बार अच्छी तरह जुताई कर लें। इसकी सीधी बुवाई के बजाय नर्सरी में पौधे तैयार किए जाते हैं और 6-8 माह होने के बाद इन पौधों की खेत में गड्ढा खोदकर रोपाई की जाती है। नर्सरी में बीज लगाने से पहले उन्हें 24 घंटे गोबर के घोल में डालकर उपचारित किया जाता है। मॉनसून में इसकी रोपाई करना सबसे उपयुक्त होता है।
सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
वैसे तो इसके पौधों कम पानी में भी उग जाते हैं, लेकिन पौधों के अच्छे विकास के लिए नियमित सिंचाई करनी चाहिए। मॉनसून के समय सिंचाई की ज़्यादा ज़रूरत नहीं पड़ती, लेकिन सामान्य मौसम में 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। साथ ही समय-समय पर निराई-गुड़ाई भी करें। इससे बिना गांठ वाली लकड़ी प्राप्त करने के लिए पौधों के 2-3 मीटर तक होने के बाद साइड से छंटाई भी की जानी चाहिए।
कितना होता है उत्पादन
मालाबार नीम का उत्पादन इस बात पर निर्भर करता है कि पेड़ों को कितनी सघनता से लगाया गया है। अधिक सघन लगाने पर 3-5 साल में 60-100 टन प्रति एकड़ लकड़ी का उत्पादन होता है। इसकी लकड़ियों को किसान बाज़ार में या ऑनलाइन बेचकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसानबचित्र सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती की लागत घटाई और अपने खेत को दूसरे किसानों के लिए सीखने का केंद्र बनाया।
- देशी पशुओं की नस्लों को मिली नई पहचान: कोप्पल गाय से लेकर तमिलनाडु का कोम्बई कुत्ता भी इस लिस्ट मेंहर नस्ल को एक Unique Accession Number दिया गया है। जैसे कोप्पल गाय (Koppal cow) का नंबर है INDIA_CATTLE_0800_KOPPAL_03056। ये नंबर उस नस्ल की पहचान का साइंटिफिक बेस्ड बनेगा।
- खेत बचाओ अभियान क्या है? शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को बताई मिट्टी की सेहत सुधारने की राहखेत बचाओ अभियान के तहत शिवराज सिंह चौहान ने खाद के संतुलित इस्तेमाल, फ़सल चक्र और प्राकृतिक खेती अपनाने पर ज़ोर दिया। जानें क्या हैं ज़रूरी उपाय।
- International Rice Conference का आगाज़: दिल्ली में 150 देशों के कारोबारियों का जमावड़ा, 200 चावल किस्मों का प्रदर्शनInternational Rice Conference में 150 से ज़्यादा देशों के ख़रीदार हिस्सा ले रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 4,649 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश शामिल हैं।
- यूपी सरकार का नया ‘आत्मनिर्भरता मॉडल’, ललितपुर बनेगा प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती ज़िलासरकार की योजना है कि गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए।
- शिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में बताया खेती और बिजली उत्पादन का तरीक़ाशिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन, छोटे किसानों की सुरक्षा और ग्रामीण रोज़गार पर ज़ोर दिया।
- ‘7th Agrivoltaics World Conference’ का आगाज़: शिवराज सिंह चौहान बोले-किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाभारत मंडपम में तीन दिवसीय ’77th Agrivoltaics World Conference’ का उद्घाटन हुआ। मंच पर जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक, ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना, सचिव संतोष कुमार सारंगी, अतीश चंद्रा और डॉ. मांगी लाल जाट सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
- प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियांप्रवीण कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का ख़र्च घटाया और बिना रसायनों के सब्ज़ियां उगाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल पेश की।
- India-New Zealand FTA ऐतिहासिक समझौता लागू : निर्यातकों को शुल्क-मुक्त बाज़ार,35,000 करोड़ के व्यापार का रास्ता खुलान्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के Foreign Direct Investment को बेहतर बनाने पर सहमत हुआ है, जिससे भारत में बुनियादी ढांचे और इनोवेशन को बल मिलेगा।
- त्रिपुरा में Oil Palm की खेती: किसानों की कमाई का नया रास्ता, लग रहीं प्रोसेसिंग फैक्ट्रियांत्रिपुरा की जलवायु ऑयल पाम के लिए अनुकूल मानी जाती है। मुफ्त पौधे, आर्थिक सहायता, तय कीमत और प्रसंस्करण सुविधाओं के संयोजन से ऑयल पाम किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई का भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
- डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड में ट्राउट मछली पालन का जायज़ा लिया, किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोरडॉ. अभिलक्ष लिखी के मुनस्यारी दौरे में ट्राउट पालन, सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक मदद और नेपाल को निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
- चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनायाKisan of India को Google पर जोड़ें चाय प्रेमियों और चाय उद्योग (Tea lovers and the tea industry) से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ी ख़बर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड (Pesticides acetamiprid and imidacloprid) के अवशेषों की अधिकतम सीमा… Read more: चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनाया
- ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान से हिमाचल के किसानों को घर बैठे मिलेगी फसल बीमा की पॉलिसी, जानिए प्रोसेसआंकड़ों पर नजर डालें तो ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जिले में कृषि लोन लेने वाले कुल 13,241 किसानों ने अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा कराया है।
- खेत बचाओ अभियान 2026: शिवराज सिंह चौहान की देश के 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक, व्यापक जनभागीदारी का लक्ष्यकृषि मंत्री चौहान ने महत्वाकांक्षी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की
- ZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए बनीं मिसालZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke को इटली में FAO के ‘100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ सम्मान से नवाजा गया।
- Self-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर, 3 करोड़+ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिलSelf-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर? जानें लखपति दीदी का लक्ष्य, ग्रामीण कारोबार और SARAS मेले से जुड़े मौक़े।
- राजस्थान के किसानों को बड़ी सौगात: फ्री मिलेगा सरसों का उन्नत बीज, कम पानी में होगी दोगुनी कमाईइस योजना के तहत सरसों की नई उन्नत किस्म आरएच-1706 दी जाएगी, जिसे 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया है।
- ESTIC 2026 में ICAR दिखाएगा कृषि की नई तकनीकें, जलवायु के अनुकूल फ़सलों से लेकर AI तक पर रहेगा ज़ोरICAR के ESTIC 2026 प्रदर्शन में जीन एडिटिंग, मिट्टी की जांच में AI, पशु स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी नई कृषि तकनीकें देखने को मिलेंगी।
- World Food Day 2026: अन्न से अन्नदाता तक, जब भारत की थाली दुनिया का पेट भरेगीWorld Food Day 2026: भारत में हर साल लगभग 68.9 मिलियन टन खाद्य पदार्थ बर्बाद होता है, जिसकी कीमत 1.53 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।
- तेलंगाना में किसानों को सौगात: कृषि यंत्रीकरण योजना में अब 60 फीसदी तक सब्सिडी, ब्रांड की बाध्यता ख़त्मराज्य सरकार ने इस बार कृषि यंत्रीकरण योजना में एक अहम बदलाव किया है। अब किसानों को किसी ख़ास कंपनी या अधिकृत डीलर से ही यंत्र खरीदने की बाध्यता नहीं रहेगी।





















