भारत में बेरोज़गारी कई दशकों से एक बड़ी समस्या रही है और कोरोना काल में कई सेक्टर्स पर पड़े असर से बेरोज़गारों की संख्या में और इज़ाफ़ा हुआ है। पिछले साल मई में कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिए देशभर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण बेरोजगारी दर 23.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के एक आँकड़े के मुताबिक, इसी साल अगस्त महीने में देश में करीबन 16 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई। इस स्थिति में मणिपुर के लीमाराम गाँव के रहने वाले कुछ बेरोजगार ग्रामीण युवाओं ने ककड़ी की खेती करने का फैसला किया।
लॉकडाउन के बीच शुरू की ककड़ी की खेती
30 से 35 साल के इन युवाओं ने मणिपुर के उत्लौ स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के ग्रामीण युवा कौशल प्रशिक्षण (STRY Scheme) में भाग लिया। इसमें इन युवाओं को ज्यादा आय देने वाली सब्जियों की संरक्षित खेती कैसे की जाए, इसकी ट्रेनिंग दी गई। इन युवाओं ने कोरोना काल के दौरान ही 1,250 वर्ग मीटर के क्षेत्र में ककड़ी की एक किस्म आलमगीर-180 (Alamgir-180) की गैर-मौसमी खेती शुरू की। ककड़ी के बीज बोने के करीबन डेढ से दो महीने में 11 बार कटाई करके 1,865 किलोग्राम/1,250 वर्ग मीटर की उपज हुई।

लागत से ज़्यादा हुआ मुनाफ़ा
ककड़ी की खेती में 11,200 रुपये की लागत आई। स्थानीय व्यापारियों को 30 रुपये प्रति किलो की औसत दर से ककड़ी बेची। इससे इन युवाओं को 55,950 रुपये की आमदनी हुई, जिसमें सीधे तौर पर 44,750 रुपये का मुनाफ़ा हुआ।
युवाओं के लिए पेश किया मॉडल
अब ये युवा ऐसे ही आधुनिक तकनीक अपनाकर अन्य फसलों की खेती भी कर रहे हैं। बाज़ार की मांग के अनुसार टमाटर, ब्रोकली, मटर, ब्रॉडलीफ सरसों, गोभी, प्याज आदि की खेती अपनाकर अब ये युवा खेती-किसानी से अच्छी कमाई कर रहे हैं। इन युवाओं से प्रभावित होकर आस-पास के अन्य किसान भी ऐसी ही आधुनिक किस्मों को अपनाकर खेती से मुनाफ़ा कमाने की राह पर निकल पड़े हैं।

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