ग्रामीण इलाकों में किसानों को आजीविका के स्थाई स्रोत प्रदान करने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जाती हैं। इन्हीं में से एक है दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (Deendayal Antyodaya Yojana – National Rural Livelihood Mission, DAY-NRLM). इस योजना के तहत झारखंड की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लेमनग्रास की खेती (Lemongrass Farming) के लिए प्रेरित किया गया।
लेमनग्रास भले ही ग्रामीण क्षेत्रों में लोकप्रिय न हो, मगर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने का यह अच्छा ज़रिया है। इसे बंजर भूमि में भी आसानी से उगाया जा सकता है। लेमनग्रास की ख़ासियत यह है कि इसे एक बार लगाने के बाद करीब 5 साल तक फसल प्राप्त की जा सकती है। इसमें सिंचाई के अलावा, किसी प्रकार की लागत नहीं आती। लेमनग्रास को एक साल में 4 से 5 बार काटा जाता है।

शहरी क्षेत्रों में है अच्छी मांग
हरे रंग का लंबा और पतला पत्ता, जिसे आमतौर पर चाय में डाला जाता है, वही लेमनग्रास है। यह औषधीय गुणों से भरपूर होता है। यह पाचन को दुरुस्त रखता है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करता है। वजन कम करने में फ़ायदेमंद और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। लेमनग्रास की इन्हीं खूबियों की बदौलत शहरों में इसके सेवन का चलन बढ़ा है। झारखंड में ग्रामीण महिलाओं को इसकी खेती के लिए प्रेरित करने के लिए पहल की जा रही है। इससे उन्हें स्थाई आजीविका का साधन मिलेगा।
बंजर भूमि में भी आसानी से उगाया जा सकता है
झारखंड के ऊपरी इलाकों में खेती बहुत मुश्किल काम है। वहां की बंजर भूमि पर बिना ज़्यादा मेहनत के लेमनग्रास की खेती की जा रही है। इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी हो रही है। लेमनग्रास को बहुत अधिक पानी देने की ज़रूरत नहीं होती। इसका पौधा बारिश के पानी से ही अच्छी तरह विकसित हो जाता है। झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसायटी (JSLPS) के तहत सखी मंडल की 500 सदस्य को इसकी खेती के लिए चुना गया। आज सभी महिला किसान सालाना लाखों रुपये कमा रही हैं।

लेमनग्रास तेल का उत्पादन
बाज़ार में लेमनग्रास तेल की अच्छी कीमत मिलती है। इसे देखते हुए ग्रामीण सेवा केंद्र में सखी मंडल के लिए कई डिस्टिलेशन यूनिट लगाई गईं। अब महिलाएं तेल प्रसंस्करण (Lemongrass Oil) भी कर रही हैं। लेमनग्रास की खेती झारखंड के 16 ज़िलों के 31 ब्लॉक की 16,500 से भी अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा की जा रही है। इसमें कृषि विज्ञान केंद्रों और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिसिनल एंड एरोमैटिक प्लांट्स(CIMAP) लखनऊ का तकनीकी सहयोग भी उन्हें मिल रहा है।

ग्रामीणों की मदद के लिए मास्टर ट्रेनर
लेमनग्रास की खेती में ग्रामीणों को तकनीकी व अन्य सहयोग प्रदान करने के लिए मास्टर ट्रेनर नियुक्त किया गया। करीबन हज़ार लोगों को किसानों की मदद के लिएट्रेनिंग दी गई।
कितनी होती है कमाई?
लेमनग्रास तेल 1500-2000 प्रति लीटर की दर से स्थानीय बाज़ार में बेचा जाता है। महिला किसान प्रति एकड़ सालाना करीब 80 हज़ार रुपये तक कमा लेती हैं। जहां तक निवेश का सवाल है तो वह सिर्फ़ एक बार में करीबन 20 हज़ार रुपये तक होता है। झारखंड के गुमला गांव की एक महिला किसान रूपमती देवी लेम ग्रास की खेती से सालाना करीबन एक लाख 10 हज़ार रुपये कमा रही हैं। जबकि लागत सिर्फ़ 30 हज़ार रुपये पड़ी। इसके अलावा, वह लेमनग्रास तेल से 15 हज़ार रुपये की अतिरिक्त आमदनी भी कर रही हैं।

रूपमती देवी का कहना है कि पहले उन्होंने कभी लेमनग्रास का नाम भी नहीं सुना था, लेकिन इसके फ़ायदे जानने के बाद वह दूसरी महिलाओं को भी इससे अपनाने की सलाह देती हैं। बंजर भूमि के लिए यह फसल सोने से कम नहीं है। झारखंड में बड़े पैमाने पर महिला किसान लेमनग्रास की सफल खेती करके मिसाल पेश कर रही हैं और उनके इस काम की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं।
ये भी पढ़ें- रोशा घास (Palmarosa Farming): बंजर और कम उपयोगी ज़मीन पर रोशा घास की खेती से पाएँ शानदार कमाई
सम्पर्क सूत्र: किसान साथी यदि खेती-किसानी से जुड़ी जानकारी या अनुभव हमारे साथ साझा करना चाहें तो हमें फ़ोन नम्बर 9599273766 पर कॉल करके या kisanofindia.mail@gmail.com पर ईमेल लिखकर या फिर अपनी बात को रिकॉर्ड करके हमें भेज सकते हैं। किसान ऑफ़ इंडिया के ज़रिये हम आपकी बात लोगों तक पहुँचाएँगे, क्योंकि हम मानते हैं कि किसान उन्नत तो देश ख़ुशहाल।

ये भी पढ़ें:
- कामधेनु योजना: 25 दुधारू पशुओं पर मिलेगी 13 लाख तक की सब्सिडी, जानिए पूरा प्रोसेसमानक डेयरी इकाई का आकार 25 दुधारू पशु है। लाभार्थी अपनी भूमि और रिपेमेंट कैपिसिटी के आधार पर, अधिकतम 8 इकाइयों (यानी 200 पशुओं) तक के लिए अप्लाई कर सकते हैं
- प्राकृतिक खेती से बचित्र सिंह चौहान ने बदली अपनी ज़िंदगी, नौकरी छोड़कर बने सफल किसानबचित्र सिंह चौहान ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती की लागत घटाई और अपने खेत को दूसरे किसानों के लिए सीखने का केंद्र बनाया।
- देशी पशुओं की नस्लों को मिली नई पहचान: कोप्पल गाय से लेकर तमिलनाडु का कोम्बई कुत्ता भी इस लिस्ट मेंहर नस्ल को एक Unique Accession Number दिया गया है। जैसे कोप्पल गाय (Koppal cow) का नंबर है INDIA_CATTLE_0800_KOPPAL_03056। ये नंबर उस नस्ल की पहचान का साइंटिफिक बेस्ड बनेगा।
- खेत बचाओ अभियान क्या है? शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को बताई मिट्टी की सेहत सुधारने की राहखेत बचाओ अभियान के तहत शिवराज सिंह चौहान ने खाद के संतुलित इस्तेमाल, फ़सल चक्र और प्राकृतिक खेती अपनाने पर ज़ोर दिया। जानें क्या हैं ज़रूरी उपाय।
- International Rice Conference का आगाज़: दिल्ली में 150 देशों के कारोबारियों का जमावड़ा, 200 चावल किस्मों का प्रदर्शनInternational Rice Conference में 150 से ज़्यादा देशों के ख़रीदार हिस्सा ले रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 4,649 खरीदारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें कुवैत, दक्षिण अफ्रीका, बेनिन, नाइजीरिया, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश शामिल हैं।
- यूपी सरकार का नया ‘आत्मनिर्भरता मॉडल’, ललितपुर बनेगा प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती ज़िलासरकार की योजना है कि गोशालाओं से निकलने वाले गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाए।
- शिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में बताया खेती और बिजली उत्पादन का तरीक़ाशिवराज सिंह चौहान ने 7th AgriVoltaics World Conference में खेती के साथ सौर ऊर्जा उत्पादन, छोटे किसानों की सुरक्षा और ग्रामीण रोज़गार पर ज़ोर दिया।
- ‘7th Agrivoltaics World Conference’ का आगाज़: शिवराज सिंह चौहान बोले-किसान अब ऊर्जादाता भी बनेगाभारत मंडपम में तीन दिवसीय ’77th Agrivoltaics World Conference’ का उद्घाटन हुआ। मंच पर जर्मनी के राजदूत डॉ. जैस्पर विक, ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना, सचिव संतोष कुमार सारंगी, अतीश चंद्रा और डॉ. मांगी लाल जाट सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
- प्राकृतिक खेती से प्रवीण कुमार ने बदली खेती की राह, कम ख़र्च में उगा रहे बेहतर सब्ज़ियांप्रवीण कुमार ने प्राकृतिक खेती अपनाकर खेती का ख़र्च घटाया और बिना रसायनों के सब्ज़ियां उगाकर दूसरे किसानों के लिए मिसाल पेश की।
- India-New Zealand FTA ऐतिहासिक समझौता लागू : निर्यातकों को शुल्क-मुक्त बाज़ार,35,000 करोड़ के व्यापार का रास्ता खुलान्यूजीलैंड अगले 15 सालों में भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर के Foreign Direct Investment को बेहतर बनाने पर सहमत हुआ है, जिससे भारत में बुनियादी ढांचे और इनोवेशन को बल मिलेगा।
- त्रिपुरा में Oil Palm की खेती: किसानों की कमाई का नया रास्ता, लग रहीं प्रोसेसिंग फैक्ट्रियांत्रिपुरा की जलवायु ऑयल पाम के लिए अनुकूल मानी जाती है। मुफ्त पौधे, आर्थिक सहायता, तय कीमत और प्रसंस्करण सुविधाओं के संयोजन से ऑयल पाम किसानों के लिए पारंपरिक फसलों के अलावा कमाई का भरोसेमंद विकल्प बन सकता है।
- डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तराखंड में ट्राउट मछली पालन का जायज़ा लिया, किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोरडॉ. अभिलक्ष लिखी के मुनस्यारी दौरे में ट्राउट पालन, सरकारी योजनाओं, वैज्ञानिक मदद और नेपाल को निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
- चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनायाKisan of India को Google पर जोड़ें चाय प्रेमियों और चाय उद्योग (Tea lovers and the tea industry) से जुड़े लाखों लोगों के लिए एक बड़ी ख़बर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय में इस्तेमाल होने वाले दो कीटनाशकों एसिटामिप्रिड और इमिडाक्लोप्रिड (Pesticides acetamiprid and imidacloprid) के अवशेषों की अधिकतम सीमा… Read more: चाय में कीटनाशक की नई सीमा: भारत ने जापान और अमेरिका से भी कड़ा रुख़ अपनाया
- ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान से हिमाचल के किसानों को घर बैठे मिलेगी फसल बीमा की पॉलिसी, जानिए प्रोसेसआंकड़ों पर नजर डालें तो ‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ’ अभियान काफी बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। जिले में कृषि लोन लेने वाले कुल 13,241 किसानों ने अपनी मक्का और धान की फसलों का बीमा कराया है।
- खेत बचाओ अभियान 2026: शिवराज सिंह चौहान की देश के 11 राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक, व्यापक जनभागीदारी का लक्ष्यकृषि मंत्री चौहान ने महत्वाकांक्षी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों को लेकर राज्यों के कृषि मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की
- ZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke ग्रामीण महिलाओं और किसानों के लिए बनीं मिसालZT Lalrithangi और Priyanka Mahesh Shelke को इटली में FAO के ‘100 Women Heroes in Agrifood Systems and Rural Development’ सम्मान से नवाजा गया।
- Self-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर, 3 करोड़+ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य हासिलSelf-Help Group women कैसे बन रहीं आत्मनिर्भर? जानें लखपति दीदी का लक्ष्य, ग्रामीण कारोबार और SARAS मेले से जुड़े मौक़े।
- राजस्थान के किसानों को बड़ी सौगात: फ्री मिलेगा सरसों का उन्नत बीज, कम पानी में होगी दोगुनी कमाईइस योजना के तहत सरसों की नई उन्नत किस्म आरएच-1706 दी जाएगी, जिसे 2023 में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार ने विकसित किया है।
- ESTIC 2026 में ICAR दिखाएगा कृषि की नई तकनीकें, जलवायु के अनुकूल फ़सलों से लेकर AI तक पर रहेगा ज़ोरICAR के ESTIC 2026 प्रदर्शन में जीन एडिटिंग, मिट्टी की जांच में AI, पशु स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी नई कृषि तकनीकें देखने को मिलेंगी।
- World Food Day 2026: अन्न से अन्नदाता तक, जब भारत की थाली दुनिया का पेट भरेगीWorld Food Day 2026: भारत में हर साल लगभग 68.9 मिलियन टन खाद्य पदार्थ बर्बाद होता है, जिसकी कीमत 1.53 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।





















